
कॉलेज की लाइब्रेरी दोपहर के 2 बजे – सबसे शांत समय। ज्यादातर स्टूडेंट्स कैंटीन या क्लास में होते हैं। पुरानी अलमारियों के बीच, पीछे वाली टेबल पर प्रिया अकेली बैठी थी। सफेद कुर्ती, नीली जींस, बाल खुले हुए, किताब खुली लेकिन आँखें किताब पर नहीं – बस सोच में खोई हुई।
गौरव अंदर आया। वो भी वही था जिससे पहली बार फ्रेशर पार्टी में आँखें मिली थीं – वो मुस्कान, वो शरारत भरी नजर। आज वो जानबूझकर यहाँ आया था। प्रिया को देखते ही उसकी साँस थोड़ी तेज हो गई। वो धीरे से उसके पास टेबल पर बैठ गया।




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