
राज ने पिंकी को बिस्तर पर उल्टा लिटाया—उसका चेहरा तकिए में दबा हुआ, कमर ऊँची, गांड हवा में तनी हुई। पिंकी की सिसकियाँ अभी भी जारी थीं, लेकिन अब उनमें एक नया डर और उत्सुकता मिली हुई थी। राज घुटनों के बल उसके पीछे बैठा, दोनों हाथों से उसकी गांड के गाल फैलाए। शाम की हल्की रोशनी में वो गुलाबी छेद साफ़ दिख रहा था—छोटा, टाइट, अनछुआ।
राज ने गहरी साँस ली, आवाज़ भारी और काँपती हुई—




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